Depression Kya Hai जाने हिंदी मे [नहीं तो अनदेखी पड़ेगी भारी]

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Depression Kya Hai

डिप्रेशन क्या है?
जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के 15 दिनों या अधिक लंबे समय तक गहरी [Depression] उदासी में डूबा रहे और इससे उसकी प्रत्येक दिन की दिनचर्या प्रभावित होने लगे तो ऐसी मनोदशा को डिप्रेशन कहा जाता है।

Depression Meaning in Hindi

यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या है जो की सामने से नहीं दीखता पर हमारे शरीर पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है दरअसल हमारे मस्तिष्क का एक खास हिस्सा जो हमारी भावनाओं को नियंत्रित करता है गहरी उदासी और डिप्रेशन की स्थिति में वह कमज़ोर पड़ जाता है इसलिए इसे केवल उदासी से जुड़ी मामूली समस्या समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। 

यहां जानते हैं यह मनोवैज्ञानिक समस्या डिप्रेशन ( अवसाद ) के लक्षण तथा ये हमारे शरीर के किस -किस  हिस्सों को प्रभावित करती है।

पाचन क्रिया पर असर:

जब व्यक्ति किसी बात को लेकर बहुत ही चिंतित या उदास होता है तो ऐसे समय मे उसका पाचन क्रिया ठीक से काम नहीं करता दरअसल डिप्रेशन के दौरान हमारे नर्वस सिस्टम की सक्रियता के कारण आंतो में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का स्राव बढ़ जाता है जिससे पेट में दर्द और सूजन सीने में जलन कब्ज़ या लूज मोशन जैसी समस्याएं हो सकती है।

रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता:

डिप्रेशन की स्थिति में व्यक्ति का रोग से लड़ने की क्षमता तेजी से घटने लगती है ऐसा तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्त्राव तेजी से होने और इसके प्रभाव से व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज नष्ट होने की वजह से होता है इसी कारण डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों मे  खासी, बुखार, सर्दी- जुकाम जैसी समस्याएं बार-बार परेशान करती है।

लीवर पर बुरा प्रभाव:

ऐसा देखा गया है की चिंता और तनाव की स्थिति में लीवर में ग्लूकोज का स्त्राव बढ़ जाता है इसके अलावा हमारे शरीर के हार्मोन शरीर में फैट की मात्रा और भूख भी बढ़ा देता है इसी कारण डिप्रेशन में कई लोग मोटे हो जाते हैं साथ ही कुछ लोगो के शरीर में शुगर का लेवल बढ़ जाता है यदि किसी को लंबे समय तक डिप्रेशन रहे तो उसे डायबिटीज़ की समस्या हो सकती है।

आपके हृदय पर प्रभाव:

डिप्रेशन के कारणों में चिंता या एंग्जाइटी जैसी समस्या सबसे ऊपर है और इसका हमारे दिल से बेहद करीब रिश्ता है तनाव व चिंता होने पर व्यक्ति के शरीर में मौजूद नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और ऐसे मे  हमारे शरीर में Norepinephrine नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। 
जिसके प्रभाव से व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल तेजी से धड़कने लगता है ह्रदय की रक्त वाहिका नली के सिकुड़ने के कारण रक्त का प्रभाव तेज हो जाता है जिससे दिल पर दबाव पड़ता है और व्यक्ति को पसीना और चक्कर आने लगता लंबे समय तक डिप्रेशन में रहने वाले में हार्ट अटैक की भी आशंका बढ़ जाती है।

सांस में तकलीफ़:

हमारे गले पर तनाव का प्रभाव सबसे पहले दिखना शुरू होता है दरअसल तनाव वाली स्थिति में गले में मौजूद तरल पदार्थ शरीर के दूसरे भागों के लिए आपूर्ति करने लगते हैं जिससे गला सूखने लगता है और मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है ऐसा होने के बाद कुछ भी खाने में दिक्कत आती है डिप्रेशन की स्थिति में कभी तेज सांस चलती है तो कभी इसकी गति बहुत धीमी हो जाती है यह दोनों ही स्थितियाँ सेहत के लिए ठीक नहीं है।

आंखें, बाल, त्वचा पर प्रभाव:

डिप्रेशन की स्तिथि में लोग अपने खान-पान पर ध्यान नहीं देते जिससे उनका पेट साफ नहीं रहता है इसकी वजह से बालों का झड़ना, सफेद होना आंखों की दृष्टि कमजोर होना और त्वचा पर जल्दी झुर्रियां और एड़ियों का फटना जैसी समस्याएं आने लगती है ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं जिससे उनकी आंखों के आगे डार्क सर्कल दिखने लगते हैं ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि डिप्रेशन में लोग अपनी फिजिकल अपीयरेंस के प्रति उदासीन हो जाते हैं ऐसे में वे अपनी त्वचा और बालों का अच्छी तरह ध्यान नहीं रख पाते इससे भी उन्हें ऐसी समस्या हो जाती है।

मांसपेशियों में दर्द और खिंचाव:

तनाव या चिंता में निश्चित रूप से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है इससे सिर और कंधे में दर्द हो सकता है कई बार इसकी वजह से माइग्रेन की भी समस्या हो सकती है डिप्रेशन में लोगों की फिजिकल एक्टिविटीज कम हो जाती है ऐसे लोग प्रायः एक कमरे में बंद पड़े रहते हैं और अपने खाने -पीने पर भी ध्यान नहीं देते ऐसे लोगों के शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हो जाती है जिससे उनके मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द की समस्या होती है।
मानसिक रोग डिप्रेशन दूर करने के उपाय

मानसिक रोग डिप्रेशन दूर करने के उपाय:-

  • जब समस्याओं का हल ना दिखाई पड़े तो अपने किसी करीबी और विश्वसनीय दोस्त से बात करें और उसके दिए सुझावों पर अमल की कोशिश करें।
  • जब भी आपको उदासी का आभास होने लगे उसी वक्त उसका असली कारण ढूंढ कर उसे दूर करने की कोशिश करें।
  • जब मन उदास हो तो उदासी भरे म्यूजिक, वीडियो और साहित्य से दूर रहने की कोशिश करें।
  • अपना थोडा स्टाइल चेंज करे इसमें आप हलके रंग के कपड़े की जगह गहरे रंग के कपड़े पहने, अपना हेयर स्टाइल बदले या फिर अपने घर के इंटीरियर मे बदलाव करे।
  • खाना बनाने का शौक है तो किचन में कुछ नया बनाए, बागवानी करें शाम को किसी पार्क में घूमने जाएं बच्चों के साथ खेलें या अपने पालतू जानवर के साथ वक्त बिताऐं ये छोटी -छोटी बातें भी बहुत जल्दी आपको तनाव मुक्त कर देगी ।

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